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सफल होने के लिए सही समय का इंतजार करते रहेंगे, तो सफलता हाथ से निकल जाएगी। इसलिए परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, वर्तमान में ही सफलता प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। हमारे आस-पास भी ऐसे कई सफल लोग होते हैं, जिनके संघर्ष की कहानी हमें सफल होने के लिए प्रेरित करती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है बिहार के मुजफ्फरपुर सुदूर बोचहा गांव के एक पिछड़े परिवार की लड़की और ‘हनी गर्ल’ के नाम से मशहूर अनीता कुशवाहा की, जो बचपन में शहद खाने की जिद किया करती थीं। आज वह मधुमक्खी पालन करके शहद के कारोबार में अपना पैर जमा चुकी हैं।

उनके गांव में हमेशा मधुमक्खियां पाली जाती थीं, लेकिन किसी महिला द्वारा मधुमक्खी पालन शुरू करने का यह पहला मामला था। इस प्रकार अनीता बिहार की पहली महिला मधुमक्खी पालक बन गईं। पहले अनीता की प्रसिद्धि उनके गांव तक ही सीमित थी । लेकिन यूनिसेफ द्वारा उनकी सफलता की कहानी को मान्यता दिए जाने के बाद उनके जीवन और गांव की रूपरेखा बदल गई। धीरे- धीरे उन्होंने और अधिक ग्रामीणों, विशेषकर बेरोजगार अशिक्षित महिलाओं को अपने साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रश्न पूछने में रखती हैं दिलचस्पी

वह बचपन में जीविका के लिए बकरियां चराती थीं। अनीता के पिता एक किराने की दुकान में काम करते थे। एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी अनीता पढ़ना चाहती थीं। लेकिन उनके माता-पिता सामाजिक और आर्थिक कारणों से नहीं चाहते थे कि वह स्कूल जाएं। गांव के एक शिक्षक ने उनके माता-पिता को समझाया कि पढ़ाई करना जरूरी है। शिक्षक ने बताया कि पांचवीं कक्षा तक की शिक्षा बिल्कुल मुफ्त है और स्कूल जाना हर बच्चे का अधिकार है। किसी तरह अनीता के माता-पिता सहमत हो गए और वह स्कूल जाने लगीं। अनीता को अच्छे अंक लाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन वह हमेशा अलग-अलग प्रश्न जरूर पूछती थीं।

पढ़ने के लिए बच्चों को पढ़ाया

अनीता के पांचवीं कक्षा पूरी कर लेने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए फीस भरने की एक बड़ी समस्या थी। वह और पढ़ना चाहती थी। अनीता ने अपने गांव में पुरुषों को मधुमक्खियां पालते हुए देखा और खुद इसे आजमाने का फैसला किया। उन्होंने अन्य बच्चों को पढ़ाकर दो रानी मधुमक्खियां खरीदीं और अपना मधुमक्खी पालन शुरू किया। ऐसा करके उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ 10वीं कक्षा तक की शिक्षा का भी खर्च उठाया।

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3,000 रुपये से शुरू किया कारोबार

स्कूल खत्म करने के बाद वह कॉलेज जाना चाहती थी. जिसके लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी। इसके लिए अनीता ने अपने बिजनेस को बढ़ाने का फैसला किया। अनीता ने 14 साल की उम्र में मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया था, जब उनकी मां रेखा देवी ने उन्हें 3,000 रुपये दिए थे। अपनी मां से मिले पैसे से, अनीता ने तीन रानी मधुमक्खियां खरीदी और अपने व्यवसाय के पहले वर्ष में 50,000 रुपये का लाभ कमाया। अनीता अब मुजफ्फरपुर के एक महिला कॉलेज से अंग्रेजी (ऑनर्स) की पढ़ाई कर रही हैं। आज अनीता के किया कारोबार पास मधुमक्खियों के 125 से अधिक बक्से हैं। वह अपना शहद स्वयं बनाती है। 2013 अनीता की शादी हुई, बच्चे हुए। अनीता अब पारिवारिक जीवन के साथ-साथ शहद का कारोबार कर रही हैं। इसमें उनके परिवार वालों का पूरा सहयोग मिलता है।

यूनिसेफ द्वारा किया गया सम्मानित

यूनिसेफ से सहायता प्राप्त ‘महिला समाख्या’ स्वयंसेवकों ने उनकी पहचान करके उन्हें एक मॉडल के रूप में अपनाया। यूनिसेफ ने उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें 2006 में यूनिसेफ गर्ल’ नाम से सम्मानित किया। उन्हें ‘हनी गर्ल’ की उपाधि राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मिली है।

एनसीईआरटी ने बनाया ‘गर्ल स्टार’

अनीता की प्रेरक कहानी को एनसीईआरटी के कक्षा चार ईवीएस (पर्यावरण अध्ययन) पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनकी कहानी, “अनीता एंड द हनीबीज” अध्याय में बताई गई है, जो उन्हें एक ‘गर्ल स्टार’ के रूप में चित्रित करती है, जिसने शिक्षा और मधुमक्खी पालन के माध्यम से अपना जीवन बदल दिया। यह एक सामान्य लड़की की असाधारण उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का कार्य करता है, जिसने सशक्तीकरण, समानता और बच्चों के लिए शिक्षा के महत्व का संदेश दिया है।

युवाओं को सीख

■ मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही लेकिन मिलता जरूर है।

■ कार्य में सफलता साधन से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से मिलती है।

■ समय कमजोर हो सकता है, लेकिन इंसान नहीं, इसलिए निरंतर प्रयास करते रहें।

■ कभी-कभी छोटे निर्णय भी जीवन की दिशा और स्थिति बदल सकते हैं।

■ जीवन को सफल बनाने के लिए आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा।

 

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