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Essay: My Dear Leader: [ रूपरेखा : (1) प्रस्तावना (2) अदभुत नेतृत्व-क्षमता (3) आदर्श नेता (4) समाज-सुधार के कार्य (5) अन्य गुण(6) अंत। ]

भारत महापुरुषों का देश है। बाल गंगाधर टिळक, महादेव गोविंद रानडे, गोपालकृष्ण गोखले, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू आदि अनेक नेताओं ने हमारे इतिहास की शोभा बढ़ाई है। इन सब में मेरे सबसे अधिक प्रिय नेता तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हैं।

गांधी जी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। सीधी-सादी सरल भाषा में दिए गए उनके भाषण देशवासियों पर जादू का-सा असर करते थे। उनकी एक पुकार पर आजादी के दीवानों की टोलियाँ मातृभूमि पर बलिदान देने के लिए निकल पड़ती थीं। पच्चीस वर्षों से भी अधिक समय तक उन्होंने अँग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध कई अहिंसक आंदोलन चलाए। अंत में अँग्रेज शासकों की लाठियों, बंदूकों, तोपों और बमों पर अहिंसा ने विजय पाई ! सदियों से गुलाम रहा भारत आजाद हुआ। इसीलिए गांधी जी ‘युगपुरुष’ कहलाए।

गांधी जी के मन, वचन और कर्म में एकरूपता थी। गांधी जी में देशसेवा की सच्ची लगन थी। वे लोकसेवा के बल पर नेता बने थे। सचमुच, वे एक आदर्श नेता थे।

भारत को स्वतंत्र कराना गांधी जी का सबसे प्रमुख लक्ष्य था, किंतु उनके प्रयत्न इस लक्ष्य तक ही सीमित नहीं रहे। वे इस देश में रामराज्य देखना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने समाज-सुधार का भी कार्य किया। उन्होंने गरीब भारत को तकली और चरखे द्वारा रोजी-रोटी दी। शराबबंदी, निरक्षरता-निवारण, स्त्री-शिक्षा, ग्रामोद्धार आदि के लिए उन्होंने अथक प्रयत्न किए। देश को एक सूत्र में बाँधने के लिए उन्होंने राष्ट्रभाषा का प्रचार किया। हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए वे आजीवन प्रयत्न करते रहे। उन्होंने अछूतों को ‘हरिजन’ नाम देकर उनका सम्मान किया।

गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। उनके जीवन में सादगी थी। उनके हृदय से दया, धर्म और प्रेम की त्रिवेणी लगातार बहती रहती थी। इस अर्थ में वे सचमुच ‘महात्मा’ थे। जिस तरह एक पिता अपने परिवार को सुखी देखना चाहता है, उसी तरह गांधी जी सारे देश को सुखी एवं समृद्ध देखना चाहते थे। इसीलिए लोगों ने उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहकर उनका आदर किया। सचमुच, वे सारे देश के प्यारे ‘बापू’ थे।

गांधी जी ने अपना सब कुछ न्योछावर कर भारत का नवनिर्माण किया। वे भारत के ही नहीं, सारे विश्व के नेता थे ! ऐसे महान देशभक्त और महामानव को यदि मैं अपना प्रिय नेता मानूँ तो इसमें आश्चर्य ही क्या है !

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